आपस की बात

अपने आत्मविश्वास को कैसे बढ़ाएं

 

जीवन में सफलता का एक ही राज है आत्मविश्वास। जिस व्यक्ति में आत्मविश्वास है वह कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना भी आसानी से कर लेता है,जबकि आत्मविश्वास से हीन व्यक्ति जीवन में आई छोटी सी परेशानी से भी घबड़ा जाते हैं। कभी-कभी आत्मविश्वास अनुभव की कमी के कारण उपजता है। वह काम जो जीवन में आपने कभी नहीं किया उसे करने में आप स्वयं को आश्वस्त महसूस नहीं कर पाते, असफल होने का एक अनजाना सा भय आपको सताता रहता है। इस भय से मुक्ति तभी मिलेगी जब आप आगे बढ़ कर उस काम का अनुभव लेंगे। सफलता असफलता तो बाद की बात है, आपने एक प्रयास किया जिससे आपको अनुभव मिला जो आगे चलकर आपके आत्मविश्वास के बढ़ाने में आपके काम आएगा।कभी-कभी असुरक्षा की भावना आत्मविश्वास की कमी का कारण बन सकती है। जब कभी हम अपनी भावनाओं अपने ही अंदर गहरे कहीं दफना देते हैं, क्योंकि हम नहीं चाहते की किसी को पता न चल जाएं कि अमुक कार्य हमें नहीं आता या अमुक कार्य करने में हमें भय लगता है। आपकी यह भावना आपके अंदर आत्मविशवास की कमी को दर्शाती है।अगर आप ऐसी किसी भावना से स्त है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है समय के साथ जैसे-जैसे आप जीवन में अनुभव प्राप्त करेंगे आपके अंदर आत्मविश्वास स्वतः ही आता जाएगा। इसके लिए आपको को अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

अपने अंदर आत्मविश्वास की कमी के कारणों को पहचानिए

 अगर आपको इस बात का भय है कि लोग आपकी कमियों को जान जाएंगे, को मनोभावना से उबरना थोड़ा मुश्किल होता है। इस भावना से निकलने का एक ही उपाय है कि आप यह बात जानने की कोशिश करिए कि आपके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। शारीरिक बनावट, ज्ञान में कमी, आपके अतीत में घटी कोई घटना या पारिवारिक अनुभव कोई न कोई ऐसा कारण जरूर होगा ही जो आपको इस भय से उबरने नहीं दे रहा।आत्म-विश्वास के निर्माण के लिए जरूरी है कि आप अपनी शक्तियों और कमजोरियों को एक यथार्थवादी ढंग से समझने की कोशिश करें। इसके लिए आपको अपने अंदर झांकना होगा यह जानने के लिए कि आखिर वह क्या कारण है जो परिस्थितियों का सामना करने की बजाय आपको कमजोर बना देता है

बेझिझक होकर अपने डर का सामना करिए

अपने आप को जानने और पहचानने के लिए एक शांत और आरामदायक स्थान पर जाइए और उन बातों के बारे में सोचिए जिनका सामना करने से आप घबराते हैं, आपको डर लगता है कि आप उन परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाएंगे। यह समझने के लिए आपको समस्या की जड़ तक पहुँचने का प्रयत्न करना होगा,यह समझने की कोशिश करनी होगी की आखिर वह कौन सा भय है जो आपको जीवन में आगे बढ़ने में बाधक बन रहा हैं। आपका रंग, वज़न, कोई बुरी आदत, कोई पारिवारिक रहस्य, पारिवारिक वातावरण या कुछ और जो आप किसी से शेयर नहीं कर पा रहे। यह प्रक्रिया निश्चित रूप से कठिन है क्योंकि जैसे ही अतीत की कोई घटना आपके सामने आएगी जो आपके मनोकूल नहीं होगी आप उसके साथ आंतरिक रूप से वाद-विवाद करने लगेंगे और खुद को सही सिद्ध करने की कोशिश करने लगेंगे। यह पूरा घटनाचक्र आपके लिए दर्दनाक हो सकता है लेकिन उन गुत्थियों को सुलझाए बिना न तो आप मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते न अपने उन डरों से मुक्त हो सकते हैं जो आपकी उन्नति में बाधक हैं।

एक बार जब आप अपनी समस्या की जड़ को समझ लेते हैं तो अब यह आप पर निर्भर है कि आप उसे सुधारना चाहते हैं या ताउम्र एक असुरक्षित जीवन जीना चाहते हैं। इसके लिए आवश्यकता होगी कि आप व्यायाम करें, खाने-पीने की आदतों को सुधारें। ऐसी किताब पढ़े जो आपको अपनी आदतें बदलने में सहायक सिद्ध हो। कुछ भी करिए पर कदम आगे बढ़ाइए। अपनी समस्या के बारे में सोचिए। ये आपको अपनी समस्या से बाहर निकलने की दिशा में बढ़ा हुआ एक कदम होगा, आप इस प्रक्रिया को सेल्फ हीलिंग कह सकते हैं।

एक बार जब आप अपनी समस्या को पूरी तर समझ लेंगे, आपका डर धीरे-धीरे स्वतः कम होने लगेगा। जब डर खत्म हो जाता है तो झिझक भी दूर हो जाती है और आप निर्भय होकर अपने कार्य करने लगते हैं।

अपनी कमजोरियों या अपनी समस्या क्षेत्रों की पहचान कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। अब बारी है अगले कदम की, आप जो करना चाहते हैं उसकी एक सूची बनाइए उनमें वे कार्यों को वरीयता दीजिए जो आप अच्छी तरह से कर पाते हैं इसे आप यूं कह सकते हैं कि सरल से कठिन की ओर अपने कदम बढ़ाएं। इस तरह आप अपनी उस ताकत को पहचानिए जो आपके अंदर पहले से ही विद्यमान थी, पर आप जानते नहीं थे। आप कुछ जन्मजात प्रतिभा के साथ जन्म लेते हैं, चाहे आप इसके बारे में जानते हो या न जानते हो। क्या आप लोगों को हंसा सकते हैं? क्या आप कलात्मक हैं? चीजों को व्यवस्थित कर सकते हैं? क्या आपको लोगों नाम आसानी से याद हो जाते हैं। संभव है आप कुछ काम आसानी से कर सकते हैं, कुछ नहीं। उनके लिए आपको अतिरिक्त प्रयास करना पड़ सकता है, क्योंकि वे गुण आपको जन्मजात नहीं मिले है।

उम्र बढ़ने के साथ ये सभी चीजें आपके लिए बहुत मूल्यवान हो जाती है। ये सभी कौशल समुदाय के संगठनों के लिए बहुत जरूरी हैं। धार्मिक, कालेज या कार्यालय कहीं भी आप अपने इस कौशल का प्रदर्शन करने में सफल होते हैं तो निश्चित रूप से आप समाज में प्रशंसा के पात्र बन सकते हैं तथा आपके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी। अपने डरों का सामना करके आप अपनी चिंता कम कर सकते हैं। आप बेहतर महसूस करेंगे और अपनी आंतरिक शक्ति को एन्जॉय करेंगे।

अपना व्यवहार बदलेंमनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हम अपना व्यवहार बदल कर अपनी भावनाएं बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपके चेहरे पर मुस्कान है इसका मतलब आप खुश रहेंगे।अपना व्यवहार बदलकर आप अपने आत्मविश्वास में वृद्धिकर सकते हैं।

प्रशन्नचित्त रहने की कोशिश करें इससे आपको नकारात्मक भावनाओं से लड़ने की शक्ति मिलेगी।
दूसरों की प्रशंसा दिल खोल कर करिए। आप पाएंगे कि दूसरे लोग भी आपकी प्रशंसा कर रहे हैं। ये तो सच ही है कि    दूसरों के मुँह से अपनी प्रशंसा सभी को अच्छी लगती है।
व्यायाम करिए और पर्याप्त नींद लीजिए। इऩ दोनों व्यवहारिक गुणों से आपका मूड अच्छा रहेगा। आप आंतरिक     और बाह्य दोनों ही रूपों में अच्छा महसूस करेंगे।
एक दिन पहले से ही अगले दिन की तैयारी कर लें। इस तरह उन गलतियों से बच जाएंगे, जिनसे आपका मूड          खराब हो सकता है। छोटी-मोटी गलतियों पर अधिक ध्यान न दें, बस इतना ख्याल रखे कि ये गलतियां दोहराई न    जाएं।

तीसरे व्यक्ति की नजर से आंकलन

एक दिलचस्प अध्ययन से यह पता चला है कि यदि आप अपने व्यवहार का अध्ययन एक तीसरे व्यक्ति के रूप में करें, तो आप अपने जीवन के लक्ष्य आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
इस अध्ययन के लिए अध्ययनकर्ता ने दो समूह बनाएं जो अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन करना चाहते थे। इसमें एक समूह को फर्स्ट परसन के रूप में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया गया। दूसरे समूह को एक बाहरी व्यक्ति की भांति अपनी उन्नति का आंकलन करने को कहा गया।

दिलचस्प बात यह है कि जिन प्रतिभागियों ने बाहरी व्यक्ति के नजरिए से खुद के बारे में सोचा उनके व्यक्तित्व में जी सकारात्मक सोच का विकास हुआ। बनिस्पत उनके जिन्होनें से स्वयं को स्वयं के नजरिए से देखा था।


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